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  • Category: Higher Secondary Education

    आर्थिक समस्या के कारण

    आर्थिक समस्या के कारण
    आर्थिक समस्या के उत्पन्न होने के दो मुख्य कारण हैं:

    असीमित आवश्यकताएं

    मनुष्य की आवश्यकताएं जो पदार्थों व सेवाओं के उपयोग द्वारा सन्तुष्टकी जा सकती हैं, असीमित होती हैं। कोई भी मनुष्य अपनी सभी आवश्यकताओं को पूर्ण रूप से सन्तुष्ट नहीं करसकता। किसी समाज के सभी सदस्यों की आवश्यकता को किसी निश्चित समय में पूर्ण रूप से सन्तुष्ट नहीं कियाजा सकता। वास्तविकता तो यह है कि मनुष्य की आवश्यकताएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। कुछ वर्ष पूर्व रंगीनटेलीविजन की कोई मांग नहीं थी परन्तु अब लगभग प्रत्येक परिवार रंगीन टेलीविजन खरीदना चाहता है। समय केसाथ-साथ वीडियो कैमरों, कीमती कारों, वी.सी.आर., डीलक्स कार, कम्प्यूटर, कैलकूलेटर इलेक्ट्रॉनिक टाईपराइटरआदि की मांग में काफी वृद्धि होने की सम्भावना है। अतएव हम यह कह सकते हैं कि किसी निश्चित समय में प्रत्येकसमाज में असन्तुष्ट आवश्यकताएं होती हैं।

    सीमित या दुर्लभस साधन

    आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए बहुत-सी वस्तुओंतथा सेवाओं की जरूरत होती है। भूख लगने पर रोटी, फल या दूध की आवश्यकता होती है। बीमार होने पर डाक्टरकी सेवा की आवश्यकता पड़ती है। प्यास लगने पर पानी की आवश्यकता होती है। सांस लेने के लिए वायु कीआवश्यकता होती है। आप यह भी जानते हैं कि पानी तथा वायु को प्राप्त करने के लिए आपको कोई त्याग नहींकरना पड़ता अथवा कोई कीमत नहीं देनी पड़ती। इसके विपरीत रोटी, फल, दूध तथा डाक्टर की सेवाओं को प्राप्तकरने के लिए आपको अपनी किसी वस्तु या सेवा का त्याग करना पड़ेगा अथवा मुद्रा के रूप में कीमत देनी पड़तीहै। इस आधार पर आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं को दो भागों में बांटा जा सकता है: (1) नि:शुल्क पदार्थ : उन वस्तुओं तथा सेवाओं को जिन्हें प्राप्त करने के लिए हमें कीमत नहीं देनी पड़ती है अथवा किसीदूसरी वस्तु या सेवा का त्याग नहीं करना पड़ता है, नि,: शुल्क पदार्थ कहा जाता है। (2)आर्थिक पदार्थ को सीमित साधन भी कहा जाता है, जैसे: रोटी, फल आदि वस्तुएं, डाक्टर, वकील आदि की सेवाएं। इन पदार्थों को सीमित इसलिएकहा जाता है क्योंकि इनकी मांग, इनकी पूर्ति से अधिक होती है। आवश्यकताओं को पूरा करने वाले अधिकतरसाधन सीमित होते हैं। यहां सीमित शब्द का प्रयोग सापेक्ष (Relative) रूप से किया गया है। हम उन साधन कोसीमित कहते हैं जिसकी मांग उसकी पूर्ति की तुलना में अधिक होती है। मान लो हम 30 किलोग्राम सेब की एकपेटी खरीदते हैं, जिसमें 25 किलोग्राम सेब अच्छी श्रेणी के हैं परन्तु 5 किलोग्राम सेब गले हुए हैं। हम उन गले हुएसेबों को फेंक देते हैं। ये फेंके गए 5 किलो सेब दुर्लभ नहीं हैं; बल्कि इसके विपरीत 25 किलोग्राम बढ़िया सेब, इन5 किलोग्राम गले हुए सेबों की तुलना में, अधिक होते हुए भी दुर्लभ हैं क्योंकि इनकी मांग पूर्ति से अधिक है। आर्थिकपदार्थ दुर्लभ होते हैं क्योंकि इनका उत्पादन करने वाले साधन (Resources) भी दुर्लभ होते हैं। साधनों से हमाराअभिप्राय प्राकृतिक, मानवीय तथा मनुष्य द्वारा निर्मित उन साधनों से है जिनके द्वारा वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादनकिया जाता है। इनके अन्तर्गत कारखाना, खेत, मशीनें, औज़ार, विभिन्न प्रकार का श्रम और उनकी योग्यताएं सभीप्रकार के खनिज पदार्थ आदि शामिल किए जाते

    अर्थशास्त्र - अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएं

    उत्पादन, उपभोग और वितरण क्रियाए प्रत्येक अर्थव्यवस्था का मुख्य गतिविधियाँ हैं|
    इन गतिविधियों के दौरान प्रत्येक अर्थवयवस्था के सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न होती हैं|
    आर्थिक समस्या वैकल्पिक प्रयोग वाले सीमित संसाधनों के जरिये असीमित आवश्यकताओं की सन्तुष्टि के लिए की जाने वाली चयन की समस्या हैं|
    इस आर्थिक समस्या के कारण प्रत्येक अर्थव्यवस्था को मुख्य केंद्रीय समस्याओ का सामना करना पड़ता है|

    क्या उत्पादन किया जाये ?
    यह समस्या उत्पादित की जाने वाली वस्तुओं सेवाओं के चयन और प्रत्येक चयनित वस्तुए उत्पादित की जाने वाली मात्रा से हैं।
    प्रत्येक अर्थव्यवस्था के पास सीमित संसाधन होते हैं तथा इन संसाधनों के वैकल्पिक प्रयोग भी होते हैं।
    इसी वजह से प्रत्येक अर्थव्यवस्था सभी वस्तुओं और सेवाओं को उत्पादित नहीं कर सकती है।
    एक वस्तु या सेवा का अधिकउत्पादन दूसरी वस्तु या सेवा के उत्पादन को कम करके ही संभव हो सकता है।
    क्या उत्पादन किया जाए समस्या के दो पहलू हैं।
    किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए।
    एक अर्थव्यवस्था को निर्णय लेना पड़ता है कि किन उपभोक्ता वस्तुओं (चावल, गेहूं, कपड़े) और किन पूंजीगत वस्तुओं (मशीन, उपकरण) का उत्पादन किया जाए।
    इसी प्रकार अर्थव्यवस्था को नागरिक वस्तुओं(ब्रेड, मक्खन) और युद्ध सामग्री(बंदूकें, टैंक) के बीच भी चयन करना होता है ।

    उत्पादित वस्तुओं का चयन करने के बाद अर्थव्यवस्था को प्रत्येक चयनित वस्तु की मात्रा भी तय करनी होती है।
    2. कितना उत्पादन किया जाए।
    कैसे उत्पादन किया जाए?
    यह समस्या वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में प्रयोग किए जाने वाली तकनीक के चयन की समस्या है।
    यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी वस्तुओं के उत्पादन में एक से अधिक संभव तरीके हो।
    वस्तुओं का उत्पादन दो तरीके से किया जाता है।
    श्रम प्रधान तकनीक- इस तकनीक में अधिक श्रम(मजदूरों) और कम पूंजी(मशीनों के रूप में) का प्रयोग किया जाता है।
    पूंजी प्रधान तकनीक- इसमें कम श्रम और अधिक पूंजी का प्रयोग किया जाता है।
    किसके लिए उत्पादन किया जाए?
    यह समस्या समाज के सदस्यों के बीच आय के वितरण से संबंधित है।
    एक अर्थव्यवस्था संसाधनों की दुर्लभता के कारण सीमित मात्रा में ही वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कर सकती है।
    इस कारण समाज अपने सभी व्यक्तियों की आवश्यकताओं को संतुष्ट नहीं कर सकती हैं।
    वस्तु का उत्पादन उन व्यक्तियों के लिए किया जाता है जिनके पास क्रय शक्ति होती है।
    अतः यह समस्या व्यक्तियों के वर्गों की चयन की समस्या है।
    प्रत्येक अर्थव्यवस्था को चयन करना पड़ता है कि वह वस्तुओं का उत्पादन अधिक अमीर और कम गरीब के लिए करें या कम अमीर और अधिक गरीब के लिए किया जाए।
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